निस्वार्थ प्रेम
कभी ये जानते हुए भी कि तुम पा ना सकोगे उन्हे.. उस शख़्स को जीया है क्या तुमने कभी किसी से निस्वार्थ प्रेम किया है? ना नसीब में हो वो शख़्स जानते हुए भी क्या दिल ने हर बार बस उनका ही नाम लिया है। क्या तुमने कभी किसी से निश्पक्ष प्रेम किया है? रात भर किसी की याद में आशुओं के सैलाब से.... सिरहाने को, भीगो लिया है। क्या तुमने कभी किसी से इश्क वाला प्रेम किया है? उनकी बचकानी हरकतों पर अक्सर मुस्कुराकर माथा उनका चूम लिया है.. क्या तुमने कभी किसी से रूहानी प्रेम किया है? मनोज सोरेन ✍️✍️✍️ दुमका jharkhand E -manojsoren5290@gmail.com
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