शब्द टूट जाते है
क्या होता है जब शब्द टूट जाते है तब बार बार जोड़कर भी उनका कुछ अर्थ नही बनता दरार रह जाती है शब्दों मे और उसी दरार से खूशबू उड़ जाती है उनकी और रंग अवनत होने लगता है गहराई का ह्रास होता है बस ध्वनि रह जाती है महसूस कुछ नही होता एक अक्षर के बाद दूसरा अक्षर खड़ा रहता है पता नही क्यों उन्हें भी खिंचाव से भर जाता है अंतरंग में इसलिए ओंठ कापते है के कहे भी तो क्या ? और आसू खारे हो जाते है ..........संदेश.........
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