मेरा अनोखा तारा धृव तारा
असंख्य तारों में से एक तारा है धृव तारा जो सैकड़ों तारों के बीच अपनी अलग पहचान बनाता है........ अक्सर ये तारे रात में खुले आसमान में शुकून जरीया होता है कहते हैं एक ऐसा तारा है जो पृथ्वी के घूर्णन अक्ष के ठीक ऊपर स्थित है, इसलिए यह उत्तरी गोलार्ध में लगभग स्थिर दिखाई देता है। यह तारा हमेशा उत्तर दिशा में होता है और रात के समय नेविगेशन के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु के रूप में काम करता है, खासकर समुद्र या रेगिस्तान जैसी जगहों पर। यह उर्स माइनर (ध्रुवमत्स्य) तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है और इसका वैज्ञानिक नाम अल्फा उर्साए माइनोरिस है। वैसे ये बात आप भी जानते होंगे, धृव तारा भगवान विष्णु के प्रिय भक्त है....और इतफाक की बात ये है हमारा कान्हा जो की शाम के समय हुआ लक्ष्मी जी तो नहीं विष्णु जी आए . जब वो अपने टिमटिमाते आंखों से मुझे देखा तभी मुझे लगा मेरा एक तारा आया...... जिसे आसमान से हमारे बड़ों ने भेजा हो एक आशीर्वाद के रूप में....... मेरा अनोखा तारा धृव तारा......।।।
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