मेरे मन के सवाल...
आज फिर मेरे मन में कुछ सवाल आया, सवाल वो जो मुझे खुद से पूछना है जवाब वो जो मुझे खुद को बताना है बताना यूं , की हालातों की दुहाई देकर मैंने खुद को इतना तनहा पाया, की कहां छुट गई वो गांव की गालियां, कहां छुट गई वो गांव की गालियां गलियों की वो यादें, और मां के डांटने पर भी वो यारों से मुलाकातें। गर्मी में बागीचे की वो ठंडी छांव, जाड़े की वो मीठी धूप, कहा छूट गई। कहां छुट गई वो नदियां वो तलाबे , तालाबों में फेंके गये कंकड़ की धाराएं और धाराओं में तैरती वो खुशियों की नांव कहां छुट गई। कहां छुट गई वो गांव की कच्ची सड़के, और उन सड़को में वो पक्के से एहसास कहां छुट गए। आज फ़िर मेरी कलम थमने से रही जी चाहता है लिख दूं वो सारी बातें, बचपन की वो भूली बिसरी यादें, यादों से मुझे एक खयाल आया, आज फिर मेरे मन में कुछ सवाल आया सवाल वो जो मुझे खुद से पूछना है जवाब वो जो मुझे खुद को बताना है
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