नारी भोग की वस्तु नहीं है।
नारी भोग की वस्तु नहीं है। कब समझेंगे ये अत्याचारी। हर दिन लुट रहा जो अस्मत हैं, ये नारपिशाचों की ज़हालत हैं। नरपिशाच सुन! नारी सृष्टि गढ़ने वाली हैं। यह लक्ष्मी दुर्गा सरस्वती और मां काली है। तूने मूर्खतावश नारी को अबला समझ लिया है, नारी वो शक्ति है जिसने यह संसार रचा है, नारी से ही तीनों लोकों का सारा वैभव सजा धजा है । बदलो अपने विचारों को और नारी का सम्मान करो। नारी की शक्ति को समझो मत उसका अपमान करो।
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