केवल में और तुम
चंचल पवन से मैं और तुम अश्रुत नयन से उत्तीर्ण चयन से सोच गहन से मैं और तुम । नभ के रंगों में, सपनों के ढंगों में शब्दों के संगों में गूँजते में और तुम। झरनों की धुन में, चंदन की गंध में, स्नेह के छंद में, रचते में और तुम। शाश्वत बंधन में स्मृतियों के चंदन में नयनों की अग्नि में जलते में और तुम।
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