मेरी मृत्यु
✍️ ईश्वर ढकाल मेरी मृत्यु शोर नहीं करेगी, न ढोल बजेगा, न कोई ऐलान होगा। वो बस एक थकी हुई साँस होगी, जो चुपचाप सीने से निकल जाएगी। मेरी मृत्यु किसी सज़ा जैसी नहीं, बस एक लंबा विराम होगी, जहाँ दर्द सवाल नहीं करेगा, और मन पहली बार थकना भूल जाएगा। मेरी मृत्यु के बाद मेरी बातें याद आएँगी शायद, मेरी बेवजह हँसी, और वो वादे जो पूरे न हो सके। अगर कभी मेरी याद आए, तो रोना मत, बस इतना कहना— “वो अच्छा इंसान था, थोड़ा ज़्यादा ही महसूस करता था।” मेरी मृत्यु अंत नहीं होगी, क्योंकि मैं तुम्हारी यादों में ज़िंदा रह जाऊँगा।
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