में क्यू लिखता हु
तू आज फिर बैठी थीं सामने एक चुस्की लेते हुए चाय की पूछने लगी कि तुम क्यू लिखते हो में उसकी आंखों में आंखे भर कर बोला बचपन की कविताओं को पढ़ता हु तो लिख देता हु रोते रोते जिस लोरी को सुन कर सोता था मां की लोरी को गुनगुनाता हु तो लिख देता हु और जब भी कभी तुजे सामने महसूस करता हु तो खो जाता हु शायद तुझमें और फिर तेरी आंखे में जब जब आंखे भरता हु तो लिख देता हु my love sahju ❣️❣️❣️
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