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दर्द ए सितम है कि थमने का नाम नही, जख्मों को सिया बहुत, खुशी का जाम नही। किसको सुनाऊँ मै हाल ए दिल, कोई मेरा महबूब नहीं जी रहा हूँ के हु जिंदा, इतनी भी मुझे सुध नही। बेकार पड़ा हू कोने में, फिर भी मुझे आराम नही। बहुत कुछ कर गए हम, मगर किसी को कोई अहसास नही। आसुओ का उमड़ा सैलाब , कभी होठों पे मेरे मुस्कान नही। मरे को मारना फितरत यारो की, के दूजा कोई काम नही। बहुत किया बर्दाश अब , सहने की ताकत नही, ना दर्द चाहिए ना सुनु, किसी खुशी की चाहत नही, थक गया इस जिंदगी से, ढलती जीवन की शाम नही। दर्द ए सितम की थमने का नाम नही। टूट गए सारे ख्वाब, जिंदगी मे कोई सपना नही, हर कोई मतलबी यार, इस जहाँ मे कोई अपना नही। चले यारो, पीया जो जहर वो अमृत का जाम नही, दर्द ए सितम है की थमने का नाम नही।
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