पन्ने ना पलटना मेरी ज़िन्दगी के
पन्ने ना पलटना मेरी ज़िन्दगी के....😔 ज़िन्दगी की किताब नायाब बहुत हैँ🤗 लिखे हैँ अनकहे दर्द और उतार-चढाव बहुत हैँ😔 तन्हाई मे अक्सर याद आते हैँ वो किस्से 🤔 दर्द और बेचैनी का मेरे जीवन मे दबाव बहुत हैं😊 अपनों ने गैर बनाया और वक़्त ने जीना सिखाया कुछ गैरों ने अपनापन दिखाया उनका आभार बहुत हैं 👏 घाव भर जाने से हादसे भूले नहीं जाते पल पल लड़नी होती हैं अंतर्मन से लड़ाई अंतर्मन मे विचारों का टकराव बहुत है😔😔
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
