शब्द बाजार
सहमी सी एक तितली फुट पड़ती है हर शाम अपनी अनगिनत कहानियों के तूफानी बौछार में। मन में बसे है हजारों दासता बगीचे के रोज़ के खेलो से उद्धरित। अपने शांत सुंदर फूल पर बैठ बनती है अपने नजराने से शब्दों का एक खूबसूरत स जाल।
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