ख्यालों की रात
सोते सोते आज फिर एक ख़याल आया दिल के किसी कोने से कोई सवाल आया चुपचाप सी रात में कुछ सरगम सी थी ख़्वाबों में तेरी यादों का जाल आया उस ख़याल के लिए फिर मैंने एक ख़याल बुना जैसे दिल ने कोई नर्म सा कमाल किया हवा कुछ कह रही थी, चाँद भी मुस्काया तेरा नाम लिए बिना तेरा हाल आया सोते सोते जो बात न कह पाए कभी वही बात आज ख़ामोशी में कमाल आया लफ्ज़ थम गए, मगर जज़्बात बहते रहे तेरे बिना भी हम तुझसे कहते रहे आँखें नम थीं, पर चेहरा मुस्कराया जैसे तुझमें ही कहीं मेरा ख्वाब समाया रात ढलती रही, दिल सुनता रहा तेरी हर याद को फिर से चुनता रहा फिर अचानक दिल ने धीरे से ये कहा "अब आगे बढ़, ये बस एक फ़साना था" वो जो कभी तेरा था, अब तेरा नहीं ख़यालों से मोहब्बत, मगर अब ग़म नहीं
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