फूलों का बाग
कलियां काली थी बागों में, फिर भी बाग सुना था. फिर भी बाग सुना था कांटे थे फूलों के रक्षक अपना होकर. उनको खोना था. . कलियां खिली थी बागों में ,फिर भी बाग सुना था. . शबनम की बूंदे और भंवरों का फूलों पर madaranaa था. कलियां खिली थी बागों में फिर भी बाग सुना था कली खिलकर फुल हुई फूलों का मुरझा ना था माली द्वारा फूलों को एक बार चुन के जाना था कलियां खिली थी बागों में फिर भी बाग सुना था कवि नसीम अली
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