शोर
शोर ====================== आज सारा शोर झुटोका, तकलादु और न्यारोमांईडका....., ऊपर से नीचे तक खेल हायवानो का। राॅयल ईंन्सा तो चुप है......, आज सारा शोर झुटो का है, गरीबोका खुन चुस, और देशसे गद्दारी कर कमाई पे, बडा नाज है ईनको। बेशरर्मी की हद हो गयी, ये धोके से कमई वाले को, राॅयल समजते है, और मेहनत की कमाईको, बेखुब झमजते है. क्या कहे ईनके न्यारो माईंड को, ईनको झोलाछाप चिल्लर कमाईको, खनखनाते फिरते है ये आपने, चार बेईमानीके शिक्के. क्या खेल है........, ईनके जानवर से मी बत्तर, न्यारो माईंडका....., फालतु ईनका आज धंदा शोर मचानेका, फालतु ईनका आज धंदा शोर मचानेका. **************************************
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
