एक रचना
चोट कैसी लगी कि माथे में हो गया छेद, ये कैसी दुर्घटना है कोई तो बताओ भेद। रक्त एकदम निर्मल है,और कहीं न चोट, ये तो नखड़ा है,पाने को सहानुभूति वोट। मूर्ख भी समझ रहा, इसकी गिरी ये चाल, कैसी ये दुर्घटना है, जो छेद कर गई भाल। सभी सावधान हो जाओ, हे प्रिय बंग वासी, ये सूबे की मलिका नहीं,ये रोहिंग्या की दासी। अभी डेढ़ माह तक और,ये करेगी नाना ड्रामा; caa और nrc लेकर, करेगी ये बहुत हंगामा। नरेंद्र 16.03.2024
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