जीवन मैत्री
हाथ थामकर ले चलो मुझे इस जलते आग के पार, सजके सोने का पथ उन्हीं यादों से जो कभी हंसा देती थी, पर अब आंखों में जलती है चिंगाढ़ी बनके।
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