दो मीठी बोल
घरकी लड्डू कितनी मीठी है, और पापा की पाँर्केट से निकली चॉकलेट! कुछ कम मीठी नहीं है। हैं पर दो मीठी बोल मैं कुछ ज्यादा मिठास है जब मां बोले तो सुकून सा.... जब पापा बोले तो झरना की पानी सा जब बहन बोल दे तो पक्का कुछ गड़बड़ है पर प्रेयसी बोल दे तो जख्म पे मरहम सा। बात इतनी ही नहीं........ कोयल सुर लगाए सुबह दो मीठी बोल की तो पूरा दिन बन जाए। दो मीठी बोल शामको मंदिर से आई गीत की दिनभर की थकान मिट जाए। अरे!!! दर्द की दवा दो मीठी बोल, सजासे रिहा दो मीठी बोल किसी भी कड़वाहट मैं मीठी चासनी भरदे बस दो मीठी बोल।
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