मन की बात
खोलकर रख दिया मैने अपने शिकायतों का पिटारा, और तुमने एक शरण में उसे पूरा नकार दिया। महसूस होने लगी है मुझे अपनी रोज की बढ़ती दूरियां, पर तुम्पर शायद उनका कोई असर नहीं। इस दिल का दर्द संभालते संभालते कही यह झूठी मुस्कान मेरा असली नकाब ना बन जाए।
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