राधे शाम
राधे शाम ======================== ऊब चुका तु लोगोसे और ऊन के मतलबी रीस्तोसे, प्यार मे धोका खाकर, हो गया तु कंगाल. तो भजले प्यारे हरी का नाम, राधे शाम, राधे शाम, छुपा है राज ईन चार आक्षरमे, तु हो जा फिरसे माला माल. राधे शाम, राधे शाम, जपले प्यारे हरी का नाम, ईन मे छुपे है चारो धाम. तेरे उदास मण की झोली खाली खाली, उसे रख दे हरी चरण के व्दार, आख बंद कर और बोल, राधे शाम, राधे शाम. सुनी सुनी तेरी......, ऊजड चुकी........., स्वपनरंजीत दुनिया मे...., भर ले प्यारे ये अनमोल नाम, राधे शाम राधे शाम...., राधे शाम राधे शाम. ===============
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