बूंदों सी कल्पनाएं
( बूंदों सी कल्पनाएं) रिमझिम - रिमझिम बरसे बादल सावन में हर्षाए बादल देखो कैसे इन बूंदों में गरज - गरज जब छाए बादल| कागज की कोई कश्ती बनाए रंग - बिरंगी छतरी लेकर पानी में हुड़दंग मचाए रानी और गौरी मिलकर मिट्टी में घरौंदे बनाए| आओ सखियों साथ हमारे बारिश के देखें मनोरम नजारे प्रकृति की आभा को ओढ़े बूंदों सी कल्पनाएं रचाएं| चारों ओर छाई हरियाली फसलों में कितनी खुशहाली नील गगन में धूप ये कैसी इंद्रधनुष का साज सजाती कितने प्यारे रंगों से बनाया नन्हीं आंखें बस सोचती जाती | शांत लगे जैसे झीलों सी कितनी गहरी ये कल्पनाएं मौसम जैसे ही हो बारिश का बूंदों ने लेली यूं अंगड़ाई| कभी बारिश तो कभी बन जाती ओस सी बदलती जैसे ये निगाहें | हर बूंद में है सन्निहित जैसे एक नवीन कहानी छोटे से उन अरमानों की रंग - बिरंगी यादों की रवानी एक हठी बालक के दिल में छिपी थी कितनी मस्ती और शैतानी | आकार था उन कल्पनाओं का उतना जितना था उस नन्हीं बूंद का थी तो छोटी सी वो बेशक पर दृढ़ निश्चय में रहना वो सिखलाए , छोटी सी उन बूंदों से ही उस घटक को पूरा भरकर वो दिखलाए | हुलस रहा कण कण माटी का उमड़ रही रस धार है , सावन की बूंदों की छुअन में खुशहाली की बहार है | झूम उठते है सभी जब भी ये बूंदे करती जैसे कल्पनाएं साकार है हर तरफ छाने फिर लगता खुशियों का रंग अपार है *। फ़ाइनल चरण कविता
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