नए महाभारत का आगाज
द्रौपदी के चीरहरण से उठी है जो चिंगारी खत्म करो श्री कृष्ण इसे क्योंकि ये दुनिया हैं बहुत व्यभिचारी भरी सभा में बैठे उन कायरो से भीष्म द्रौणाचार्य धृतराष्ट्र जैसे नामर्दों से मुक्त करो हमे तुम बस ग्लानि है मुझे इन पापियों से कुलवधु को निर्वस्त्र करने की चाह रुलाएगी इन पापियों को युद्ध नहीं महायुद्ध की ललकार है महाभारत की अब बस यही शुरुआत है कलयुग में आए है ये पापी फिरसे लेगी जन्म ये द्रौपदी इनके लिए करेगी नरसंहार सबका लिखेगी महाभारत का एक नया अध्याय
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