नफ़रत के रंग
एक बार फिर नफ़रत का जहर घोला जाएगा। फिर से हिंदू मुस्लिम का राग गाया जाएगा। अपने त्यौहार को सर्वश्रेष्ठ बताया जाएगा, रंगो के नाम पर धर्म का पाठ पढ़ाया जाएगा। नफ़रत का रंग उड़ाया जाएगा, भगवे और हरे को आपस में लड़वाया जाएगा भोली भाली जनता को फिर से उकसाया जाएगा, शांति वाले देश में अशांति को भड़काया जाएगा। अफसर शाही को अंगुलियों पर नचाया जाएगा, नौकरी खोने का डर दिखाया जाएगा। अपने वोट बैंक को ऐसे ही बढ़ाया जाएगा, कुर्सी पर बैठकर खूब माल उड़ाया जाएगा। पढ़े लिखे लोगों इनकी बातों में क्यों आते हो, इनके बिछाए जाल में क्यों फंस जाते हो। आओ मिलकर कुछ इस तरह से त्यौहार मनाए, हमारे साथ वो भी मुस्काए, हम बोले ईद मुबारक, वो भी होली के रंग उड़ाए।
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