आत्मा परमात्मा
आत्मा मिलने चली परमात्मा से, हुआ आत्म का मिलन परमात्मा से रोता है क्यों बंदे तेरे मिलने पर तो वो खुश रहा न तुझसे शिकवा कि न ही शिकायत तेरे मिलने को प्रेम दिया गया, उसके मिलने को अंत क्यों? तू कितना स्वार्थी है..... स्वार्थ से भरा तेरा मन अपने पे आई तो याद आई दूसरो को भूल गया खुद अपने मिलन से खुश दूसरे के मिलन से दुख आत्मा चली मिलने परमात्मा से। समझ तुझे भी आयेगा जब, हटेगा तेरे चेहरे पर पड़ा ये मोह दिल मे बसा अपनेपन का ढोंग कम से कम अब तो खुश हो जा तेरे जैसे का मिलन नही आत्मा चली मिलने परमात्मा से। हां तू भी क्रंदन किया जब तुझे तेरा नही मिला... ..बिछड़ा परमात्मा आत्मा से भी तो सबकुछ है छीन गया चार दिन रो लेने से गया वापस आ जायेगा आत्मा चली मिलने परमात्मा से। आज मिलन हो जाने दे नाच, बजा मजीरा ढोलक कर खुशी-खुशी विदा उसको तेरे रोने से गया वापस आएगा नही रोक मत जाने से। By: ANANT YADAV
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