प्यार ही निरंकार
प्यार केवल एक शब्द ही नहीं,ये जीवन का सार है। जिसने इस प्यार को जीया,पाया उसने करतार है। प्यार को केवल शब्दों में दोहराना ही नहीं होता,इसे निभाना भी होता है। जात पात के बंधन से ऊपर उठ कर, सब को गले लगाना होता है। नफरत,वैर,तंगदिली और ईर्षा को दिल से मिटाना होता है। अपने अंदर की खुदी को जड़ से मिटाना होता है। जिस दिन हमारे अंदर से होगा सब विकारों का विनाश,तब केवल बचेगा प्यार ही प्यार। बस यही है निरंकार ,यही है निरंकार।
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