अलविदा जुदाई
मुस्कुराकर अपना ली भीड़ में तनहाई मिटने की वो दवा जिसने खींचकर निकाल दिया दुनिया के जंजालों से और ले बाहों में उसके हर खामी को आजमाकर हर चोट पर मरहम लगाया और उसे दर्द से आजाद कर दिया
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
