प्यार के कितने रंग
प्यार ,प्रेम, इश्क जाने कितने ही रंग उकेरता है, जिंदगी एक अधूरा ख्वाब है, हर पल नए रंग बिखेरता है। पर जनाब यही तो इश्क है नजाने कब किस मोड इकरार कर जाए, कब किस मोड बेकरार कर जाए। प्यार के ती रंग नामूराद है जब-जब हमने जिसे चाहा, तब-तब उसने हमपर ही पलटवार कर दिर। उनका एक अक्स देख पाने की चाहत में, जाने जाने कितने ही कोशिश बेबाक कर दिए । लोग कहते है ये सतरंगा, पर इश्क के अस्ल माइने तो उनसे पूछो जिनपे इसका जादू फिर कर भी मिल न सका, तड़पता रहा 'वो अंदर ही अंदर पर, अपने दर्द को बयां कभी कर न सका। समय हो चला है आपसे विदा लेने का जाते - जाते वो चार पंक्ति सूना जाती हूँ जब किसी ने बोला था क्यों नहीं भुला देते उसे– उसे भूला पाना है मुश्किल, वो यादें दिए जाता है उसकी स्मृतियों के सौदागर बने हम, और वह क्षण भर में टूट जाता है।
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