आम
प्रिय आम फलों के राजा आम! तुम राजा हो — फलों के राजा, तुम्हारा राज्य बस फलों तक सीमित है। ये भूलना मत कभी — कि तुम राजा हो, बस फलों के राजा, और तुम्हारा राज्य 'फल तक' ही सीमित है। तुम्हें लोगों का प्यार मिलता है, उनकी वफ़ादारी मिलती है, तुम्हारे लिए कई फलो को नज़रअंदाज़ कर देने की खुली और दौड़ती हुई इच्छा — और ना जाने क्या-क्या मिलता है तुम्हे! ये सब तुम्हें तब तक ही मिलेगा जब तक तुम 'अपने राज्य ' तक ही सीमित रहोगे। और यही सब तुम्हें राजा बनाता है (फलों का राजा — ये मत भुलना)। अपने राज्य तक सीमित रहने पर तुम्हें असीमित प्यार मिलेगा; तुम्हारा राज्य न जाने कितने सालों तक रहेगा — शाश्वत-काल तक याद किए जाओगे तुम । सीमित रहने से अगर असीमित प्यार, इज़्ज़त, वफ़ादारी, आदर मिले — तो यह सबसे सस्ता और महँगा सौदा होगा। सस्ता इसलिए कि इसकी कोई मौद्रिक कीमत नहीं; और महँगा इसलिए क्यों कि इसे मुद्रा से खरीद पाना बड़े-बड़े पूंजीपतियों के बस की भी नहीं है। आम, मैं तुम्हें सदाबहार देखना चाहता हूँ। तुम ना जाने कितनों को मिलाते हो, ना जाने कितनों को भिड़ाते हो — और आखिर में सबका मुँह मिठास से भर देते हो; तुम्हारा मीठापन ही लोगों को तुम्हारे प्रति कायल बनाए रखता है। तुम सदाबहार रहो, मेरे साथी। तुम्हारा— मतवाला।
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