नियति
अरे नया क्या हुआ जो रोता है वही पुरानी बात वही पुराना राग वही तेरे निष्फल संवाद व प्रयास वही उलझन वही रुदन क्षद्म अपराध। तु कौन जो होनी को टालेगा तू किसे पाप- पुण्य समझाएगा अब भाग्य का लिखा कैसे बदलेगा तू वही कर न जो कर सकता है भाई। क्या हो रहा वहाँ तुझे खबर नहीं तेरे जाने न जाने से कोई असर नहीं तू जाकर भी बैरंग ही आएगा वहां कौन है तेरा जो तू समझाएगा। तेरी चिंता जायज है अब होनी को कौन टाल सका जो होगा वो सामने आयेगा तू बेकार अपराध बोध में जल रहा।
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