"ख़ुद को चुनो"
सुनो तुम तो वहीं हो ना, लोगों का क्या है ये कहते है, इन्हें बस कहने देना। तो जो ना समझें उन्हें ना समझी में रहने देना, जब मन भारी हो तो ज़ुबान को कहने देना । अपने मन की सुना लेना लोगों की रहने देना, हर बार मज़बूत मत बनना कभी कभी आंसुओं को बहने देना। तुम अपने लिए जी लेना सबकी परवाह करना छोड़ देना, कुछ अपनी खुशियां चुन लेना सबके गमों की चिंता छोड़ देना। याद रखना अंत मे तुम ही होगे जो अपने साथ होगे, तुम ही होगे जो अपने आंसू पूछोगे। तुम ही होगे......... जो ख़ुद को सहलाओगे, बहलाओगे, समझाओगे तुम ही होगे जो ख़ुद को फ़िर से बनाओगे ! ✍️पूजा लोहार (डायरी से)
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