एक बनो नेक बनो
अगर जोड़ने की कूबत न है समाज को, तो समाज में शोले भड़काया मत करो; बुझा सको तो बुझाओ,वैमनस्य की आग, बुझते मुद्दों में सलाई जलाया मत करो। मत बनो समाज के जहरीले काला नाग, हर वक्त यूँही विषवमन मत किया करो; बनना है तो बनो शांति के सन्देश वाहक, "जिओ और जीने दो"का संदेश दिया करो। बैर के बीज बोने व अतीत को कुरेदने से, समर्थ सर्वसमाज का निर्माण नहीं होगा; देश आजाद हुआ है,सब बराबर हो चुका, राजनीतिक रोटी सेंकने से कुछ नहीं होगा। नरेंन्द्र सिंह 25.01.2024
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