तब जाकर हम एक शिक्षक कहलाते है
कच्ची मिट्टी को पक्का बर्तन बना दें लकड़ी की नाव समंदर पर चला दें तेज आंधी में ज्ञान का दीपक जला दें और तुम्हारे अंदर का अंधकार मिटा दें जीवन जीने का तरीका बताते हैं तब जाकर हम एक शिक्षक कहलाते हैं हमने अपने ज्ञान में थोड़ी तकनीकी मिलाई गूगल मीट और जूम से ऑनलाइन क्लासेज चलाई बेशक हमें कोरोना की देर में मिली हो दवाई लेकिन तुम्हे पढ़ाने में कभी नहीं की ढिलाई अरे हम तो वो हैं जो जुगनू को सूरज बनाते हैं तब जाकर हम एक शिक्षक कहलाते हैं चाहे कितनी भी परेशानी से लड़ते हों हम तपते हों बुखार में और कितना ही हो गम कभी भी कहीं भी तुम्हे आंकते नहीं हैं कम तुम्हे ऊंचा उठाने में लगाते है पूरा दम बिना पंखों के पंछी को आसमान में उड़ाते हैं तब जाकर हम एक शिक्षक कहलाते हैं
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