शीर्षक :प्रेम पूर्वक जिएँ
होली के ये विभिन्न रंगों में, अपनी आत्मा का एक रंग हो। हमसब प्रेम से मिलजुल कर रहें , आपस में न रंजिशे न जंग हो।। शिकवे गिले भूल जाएँ सारे, तनिक नहीं दिल में कालिमा रहे। सबसे गले मिलें खोलकर हृदय, सबके चेहरे पर लालिमा रहे।। सोचो क्या है अहंकार में रखा , व्यर्थ जिसे पाले हो दिमाग़ में। दो दिन का है यह जीवन मेला, फिर जलना ही है इसे आग में।। नरेन्द्र सिंह, मोहनपुर, अतरी, गया 14.03.2025
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