ऐ जिंदगी
ऐ जिन्दगी ! मैं तुझे लौटती हु। ये दुनियादारी की समझ, ये रिश्तों की परवाह, ये इज़्जत का शौक, ये बातों की बुनाई, ये समझदारी की सिलाई, ये बाजार की चतुराई, वो कही न डरने का हुनर, वो किसी से न लड़ने की समझ, वो आसू अंदर ही दबाने का दम।। ऐ जिन्दगी मैं तुझे नया सब कुछ लौटती हूं तू मुझे वो बचपन की नादानी लोटा।।
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