२८/१०/२०२४
ये लोग ये महफिल मुझे रास नहीं आती, उसके साथ गुजार सकूं वो रात ही नहीं आती। इतना कुछ लिखता, सोचता हूं दिनभर, उससे मिलता हूं तो मुंह पर एक बात नहीं आती। यूं बात नहीं कि ये महफिल गुनहगार है, बात तो ये है कि वो साथ ही नहीं आती। मैं भी तो नहीं कह सकता हर वक्त हर दफा, मैं नहीं कहता मतलब मुझे याद ही नहीं आती? मेरे दिल का हाल ये दर्द मैं जनता हूं खूब, बस इजहार कर सकूं ऐसी मुलाकात ही नहीं आती।।
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