वो आयेगा।
हम तो पागल हैं, जो इंतजार में रहे कि वो आएगा; जो वादे कभी किए ही नहीं, उन्हें भी निभाएगा। दिल भी पागल है, जो सोचता है वो मेरे लिए नींद को ठुकराएगा; मगर जरूरी नहीं कि मुझ-सी सुकून की चाह उसे भी हो; एकतरफा राब्ता कोई भला क्यों निभाएगा? हम तो मर जाएँ उसकी तबस्सुम के लिए, क्या वो हमारे जनाज़े में भी आएगा? हमारी तो नींद से हो गई अनबन, क्या तू भी कभी नींद लुटा पाएगा? यादों के जालों में उलझ गई है जिंदगी मेरी, क्या तू आके इन्हें सुलझाएगा? हर महफ़िल की आरज़ू हो तुम, जो मक़बूल ही नहीं कहीं— कहाँ जाएगा?**
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