तुम कागज बन जाओ
सुनो तुम कागज बन जाओ मैं कलम की स्याही बन,तुम से लिपट कर उभरता जाऊंगा। सजाऊंगा तुम्हे शब्द रूपी मोतियों से व्याकरण के अलंकार,तुम्हे उपहार लेके आऊंगा, सुनो तुम कागज बन जाओ मैं कलम की स्याही बन,तुम से लिपट कर उभरता जाऊंगा। कागज के बिना कलम की स्याही की वजूद नही होती, सुना है मोहब्बत हर जगह मौजूद नही होती दिलों में भाव होने चाहिए,किसी से इश्क होने के लिए तुम्हे मैं प्यार की मजधार में,साथ ले बह जाऊंगा सुनो तुम कागज बन जाओ मैं कलम की स्याही बन,तुम से लिपट कर उभरता जाऊंगा। तुम बिन है नही, अस्तित्व मेरा कुछ, तुम्हे पाकर के पूर्ण हो जाऊंगा,अस्तित्व मे मै आ जाऊंगा सुनो तुम कागज बन जाओ मैं कलम की स्याही बन,तुम से लिपट कर उभरता जाऊंगा।
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