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हमेशा मुस्कुराता रहता हूं मैं, पता नहीं... क्या गम है जो छुपाता रहता हूं मैं ? जब कोई अनजान भी मेरी तरफ़ देखता है, तो मुस्कुरा देता हूं मैं, बदले में वो भी मुस्कुरा देते हैं। पर जब कभी कोई पूछ लेता है, क्या हुआ? तो बेजवाब हो जाता हूं मैं, भावहीन चेहरा लिए चला जाता हूं मैं। कब तक ये झूठ चलता रहेगा किसी दिन तो पकड़ा जाएगा तब मैं क्या करूंगा... क्या मैं अपने गम बयां करूंगा ? खुद को कमजोर साबित करूंगा ? लोगो के लिए परिहास का विषय बनूंगा ? मैं ऐसा क्यू करूंगा... मैं अपने झूठ को और मजबूत करूंगा, सच पढ़ लेने वाली आंखों से बचता रहूंगा, मैं रोज तिल तिल मरता रहूंगा, हां... मैं हमेशा मुस्कुराता रहूंगा।
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