लोग क्या कहेंगे
हम हमेशा इसी उलझन में रहते हैं लोग क्या कहेंगे ना जाने क्यों हम इसी बात पर उलझते जा रहे हैं दिल और दिमाग कुछ ओर कहता हैं करने को ओर हम कुछ ओर ही कर लेते हैं इस डर से की लोग क्या कहेंगे इसी सब बातों में जिंदगी उलझ सी गई हैं की लोग क्या कहेंगे जितना हम नहीं जी रहे अपने बारे में उतना लोगों ने जी लिया हमारे बारे मैं सोचने के लिए वक्त बहुत हैं हमारे पास की लोग क्या कहेंगे खुद के लिये सोचना भूल गए हम यही सोच _सोच कर कि लोग क्या कहेंगे
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