अभागी
दुसाशन की सभा लगी है, कलियुग के बाजारों में, द्रौपदी भी भरी पड़ी है ... हर पन्ने अखबारों में.......! कब तक आस लगाओगी, खुद ...मां के गद्दारों से.... खड्ग उठाना होगा खुदको ही.. लड़ना होगा दुशासन दरबारो से अब अखबार भी भरने होगे राक्षस के संहारो से......! "
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