कविता
नमन #काव्यस्थली #दैनिक प्रतियोगिता #दिनांक-२९/०३/२०२४ #विधा-कविता #विषय-स्वैच्छिक शीर्षक-कविता कविता अपने आप में भी स्वतंत्र नहीं है उसे भी प्रतिनिधित्व करना होता है सदा, कभी समाज का ,कभी रीति-रिवाज का। फसलें जलती, कविता ढुंढती है शब्द को, अतिवृष्टि होती,कविता ढुंढती है शब्द को, भूख से तड़पते है बच्चें,ढुंढती है शब्द को, आखिरकार कविता भी विज्ञानभाषी है। कविता शब्द को स्वतंत्र नहीं रहने देती है, शब्दों को आपस में लड़ाकर अपना रूप तैयार करती है, तब जाकर एक कविता सृजन होता है।। सुनील कुमार "सत्यार्थी" स्वरचित रचना
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