धरती माता
●●● धरती मां हर पल देती है करुणा की सौगात। ऊंचे ऊंचे पर्वत, नदियाँ, जंगल और बरसात।। झरनों की सुंदरता देखो, जीवनदायिनी बयार। धरती मां की गोद मिली है मातृत्व की सौगात।। नीला अम्बर, बादल सूरज, चंदा और सितारे। प्रकृति के रंगों से जगमग अपनें सपने सारे।। मिट्टी की सौंधी खुश्बू है वात्सल्य अहसास। बारिश की बूंदों में जैसे बसते हैं जीवन धारे।। पृथ्वी का हर अंश सिखाता हमको करना प्रीत। घने पेड़ों की शाखाओं पर नित पंछी गाते गीत।। सब मिल करें रक्षा इसकी इसी में अपनी जीत। धरती के कण कण में मानो गूंज उठा संगीत।। पृथ्वी संरक्षण में निहित इस जीवन की शान। हम सब का कर्तव्य संभालें और बढ़ाएँ मान।। आओ हम सब मिलकर करें धरती का सम्मान। 'अयन' धरा है माता सबकी रक्खें इसका ध्यान।। ●●● ©deovrat 'अयन' 21.04.2025
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