पाखंड
जात पात का जाल बिछाया, अपने की ही सर्वश्रेष्ठ बताया। पाखंड का ऐसा खेल दिखाया, हर जन को भ्रम मिथ्या में फंसाया। दो मंत्र सीख कर कहलाए ज्ञानी, मुफ़्त का खाकर हुए बड़े अभिमानी। अनोखा माया जाल बिछाकर , सबको मूर्ख बनाया, ढोंग किया ऐसा, पत्थर को ही भगवान बनाया। अपने को सबसे ऊपर बताया, दूसरे धर्म से नफ़रत करना सिखाया। एक जाति को मंदिर में प्रवेश तक न करवाया, अपने लिए अलग से सिंहासन बनवाया। चंदे से अपने लिए महल बनवाया, चंदा देने वाला गरीबी से ऊबर नहीं पाया। अपने बच्चों को विदेशों में पढ़ने को लगाया, दूसरे के बच्चों की धर्म की रक्षा में उलझाया। देख कर इनका ढोंग , इनकी मोह माया, ऊपर बैठा ईश्वर भी शर्माया। पाखंड देखकर फिर थोड़ा सा घबराया, कहीं तुझको ही ना बेच दे ये डर भी सताया।
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
