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गुनाहों के हिसाब तमाम रखने लगा हूँ, अब अपने काम से काम रखने लगा हूँ। किसी की गलतियां नहीं गिनाता अब, खुद पर ही सारे इल्ज़ाम रखने लगा हूँ। भले छोटा परिंदा हूँ पर हौसला बहुत है, ऊंची परवाज ऊँचे मुकाम रखने लगा हूँ। जब शालीन था,सबने सताया था बहुत, इसलिए अब जुबां बेलगाम रखने लगा हूँ।
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