उल्लाला छंद
कंचन काया कामिनी कंचन काया कामिनी, लगती उज्ज्वल यामिनी। रूप छटा अति भव्य है, मानो रम्भा सत्य है।। उर मोहक मन भामिनी, जैसे चमके दामिनी। मन में भरती जोश है, करती ये मदहोश है।। नागिन जैसी ऐंठती, युवा वक्ष में पैठती। नीली ऑंखें शोभती, हर दिल को है मोहती।। धवल वसन में है खड़ी, घने बाल है लट बड़ी। चितवन निगाह डालती, कितने को ये सालती।। नरेंद्र सिंह, अतरी
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