बस यूं ही!
हम करना नहीं चाहते थे उचे मोहब्बत क्योंकि धोखा ही मिलता है मोहब्बत के सफर में उच ने खुद ही दस्तक लगाई मेरे दिल पे मोहब्बत हो गया कामजोर दिल ना माना और जब मोहब्बत हुई तो उचने हमारी मोहब्बत पर सवाल खड़ा कर दिया तकलीफ़ मोहब्बत नहीं देती मोहब्बत करने वाले देते हैं और मोहब्बत सूरत देख के नहीं नियत देख के किया जाता है उसने मोहब्बत मांगी हमने चाहा नहीं था फिर भी दे दिया अब जब मेरे हिसे का मोहब्बत मांगा तो अब वो हमें ही पूछ रही है मोहब्बत क्यों किया किसी ने खूब कहा है शायर से नहीं शायरी से प्यार करो मोहब्बत से नहीं मोहब्बत करने वालो से दूर रहो Surajit Sarma
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