अनजानी नादानियां
नासमझ सी एक चिड़िया, बंध कर समाज के डोर में, उड़ चली पहाड़ों के पार, छोड़कर अपने सारे रिश्ते, दूर गगन के अजीब स्थल पर अपना घर बसने। नई खुशियों और नए घर में अपनी नई पहचान बनाई पर मजबूत जड़ों ने कभी अपनो का साथ छुटने ना दिया।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
