पर्दा
पर्दा ========================== जो समजते है खुले विचारो कीभाषा, ऊंन्हे क्या डर है पर्देका, झुकी झुकी नजर तो, ऊन की होती है, जो करते है, बुरे काम पर्दे मे रहकर. जीनका कोई राज छीपा नही, है, वो क्यु करे पर्दा, दोष पर्दे का भी नाही है, बुरे कर्मो को जो झाकना चाहते है, पर्दोसे..!. बेहाया, बेपर्वा, हमेशा, हामसा पर्दा......, मोहब्बत के नाम पे..... और गैर से वफा..., शरराफत के नाम से, आखीर क्यु ये पर्दा. पर्दो की भाषा पर्दे ही समजते है, हम तो खाली रोजगार है, पर्दे नीकालना , और लगाना, हमारा काम है. वो तो पर्दे लग्ने वाले जाने, राज क्या है.... !, राज क्या है. ============
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