तब याद आऊंगा मैं
जब भी सताएगी तन्हाई जब साथ ना देगी परछाई तब तुम्हें याद आऊंगा मैं, जब फुर्सत मिलेगी मुझे आजमाने से जब वाकिफ हो जाओगे जमाने से तब तुम्हें याद आऊंगा मैं, जब कहने को होगी दिल की बात, जब काटे ना कटेंगे दिन व रात तब तुम्हें याद आऊंगा मैं, जब कभी सुनोगे मोहब्बत की बातें, जब याद करोगे दिन वो रातें तब तुम्हें याद आऊंगा मैं, जब टूटेंगे तेरे वो सपनों के आशियाने वक्त लाएगा जब हकीकत को सामने तब तुम्हें याद आऊंगा मैं, जब करोगे तुम भी मोहब्बत किसी से और छोड़ जाएगा तुम्हें वो भी खुशी से तब तुम्हें याद आऊंगा मैं, जब रोना भी चाहोगे और ना होगा कोई कांधा जब तरस जाओगे एक सहारे के लिए तब तुम्हें याद आऊंगा मैं खैर मैं तुम्हें कभी बद्दुआ नहीं दूंगा बनी रहे खुशियां तेरी ये दुआ दूंगा मगर जब कभी छाएगी उदासी तब तुम्हें याद आऊंगा मैं..!!
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