🥺😕
शायद पहली और आखिरी हमने गलती कर ली, हमने आकर बातो मे ममन के, जमाने से दोस्ती कर ली। हर कोई मिला अपने सिक्के को चलाने के लिए रास्ते पर, हमने खुद के हाथो से तैयार डूबने की कस्ती कर ली । जब सब ही लूट जाने को बाकी था तो क्या करते हम, हमने उलझन को आग लगा बचपन को याद कर मस्ती कर ली। देते रहे ताने लोग अपनी मुताबिक हमारे किरदार पर, हमने जरा दिवार ऊँची करवा, कैद अपनी हस्ती कर ली। जो मिला सब बटोर कर चलते रहे हम गम, ताने, साजिश, थकने लगे कदम हमारे तो तैयार फिर उनसे बस्ती कर ली।
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