कुण्डलिया
- शीर्षक-- आभारी आभारी हूँ आपका, बना रहूँ मैं दास। मुझे शरण में स्थान दें, बहुत बड़ी है आस।। बहुत बड़ी है आस, निकट रह करते सेवा। मन में तनिक न लोभ, नहीं है चाहत मेवा।। रखें चरण के पास, कृपा बस बरसे न्यारी। मनन भजन में लीन, रहेगा यह आभारी।। सबके प्यारे आप हैं, जग के हो आधार। आभारी सब आपका, जाने यह संसार।। जाने यह संसार, ईश ही पालनकर्ता। प्रभु ही खेवनहार, लोक के तारणहर्ता।। भक्त खड़ा है द्वार, पुराना सेवक कबके। दया करें हे नाथ,आप ही मालिक सबके।। नरेंद्र सिंह,20.05.2025
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